थे ढोलकड़ी ढमका दयो राजस्थानी लोकगीत

बलिहारी जाऊं सा।। थे ढोलकड़ी…

बादल म्हारो लहंगा जी, किरण है म्हारी मगजी।

मैं तारागण रा झुमका झुमकती चलूंसा ।।

थे ढोलकड़ी…

चालूं तो कहियाँ चालूं चन्द्रमा म्हारा लारे,

मैं कोयल कूक सुनाती चलूंसा ।। थे ढोलकड़ी…

मैं निर्मल पानी धारा थे म्हारो छो किनारा

मैं कामणजारी नैनों मिलाती चलूंसा ।।

थे ढोलकड़ी ढमका दयो मैं वारी जाऊं सा।

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