मंगलाचार हिंदी राजस्थानी लोकगीत

आओ मंगल दीप जलायें
आओ मंगल दीप जलायें

कर स्वागत दुलहन घर लायें।

करते स्वागत बहू तुम्हारा,

जगमग भवन आलोकित सारा,

भर-भर खुशियां आज लुटायें आओ मंगलदीप जलायें।

तुम ले प्रकाश आई हो सजनी,

भर उर में उल्लासें कितनी,

आशाओं के दीप जलायें।

कर स्वागत दुलहन घर लायें ।।

विहंस उठे नव जीवन तेरा,

सदा सौभाग्य लिये हो सवेरा शुभ सन्देश सुनाते आयें।

आओ मंगल दीप जलायें।।

गूंथ प्यार और प्रीति की लड़ियां,

करो पिया के संग रंगरेलियां सपने सब साकार बनायें।

कर स्वागत दुलहन घर लायें आओ मंगल दीप जलायें।।

गाओ री मंगलाचार

गाओ री मंगलाचार, दुलहनियां आई है।

लगती सुन्दर प्यारी दुलहनियां, बांधो री बंसवार ।।…

दुलहनिया… दुलहन के हाथों मेहंदी सजी है,

दुलहन के अंग साड़ी सजी है,

घर आंगन सब जगर-मगर हैं, दूल्हे के मन में चाव।

दुलहनियां.. गावो री मंगलाचार दुलहनियां आई है।

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