राह तके बन्ना हिंदी लोकगीत

हरे-हरे बांस कटाओ मेरे बाबुल

हरे-हरे बांस कटाओ मेरे बाबुल,

ऊंची छावो चौपाल रे।

सागर ताल खुदाओ मेरे बाबुल,

हाथी पिये जल नीर रे।।

मैं तो बाबुल जैसे जोगन की चिड़िया रात बसें दिन उड़ चले।

बाबुल घर हम धीयर बिहायी,

रात बसें दिन उड़ चले।।

छोटे बीरन मोरी पकड़ी पलकिया,

मोरी बहन कहां जाउ रे।

छोड़ो बीरन तुम हमरी पलकिया,

हर परदेसी लोग रे।।

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