लग जइहें नजरिया हिंदी लोकगीत

लग जइहें नजरिया परदे भीतर कर लो जी,

लग जइहे नजरिया।

परदे भीतर कर लोरी.

लग जइहे नजरिया।

ये बनड़ा बाबुल जी के प्यारे,
घर दुलहन आई गावें खुशी के गीत री,

घर दुलहिन आई। आज पिया घर आई हो बाला,

लिये प्रेम की माला, तेरे जीवन का मीत री..घर दुलहिन आई…

लाज शरम का चूंघट खोले,

नयना आंखमिचौली खेले.

दिल में छिपाकर प्रीत री घर दुलहिन आई….

सुन्दर मुखड़ा लाख अदायें,

रात खुशी के नगमे गायें तारों से ले संगीत री घर दुलहिन आई…

कर अठखेलियां, पिया संग प्यारी,

दिल की लुटी जागीर तुम्हारी,

हुई है किसी की जीत री घर दुलहिन आई…

सास ससुर की बनो दुलारी, चूमें मांग,

अशीष दें भारी, कुल की यही है रीति री घर दुलहिन आई…

गावें खुशी के गीत री, घर दुलहिन आई।का शौक है,

सासू ने भेज दिया टीका। न जाने वर कैसे मिलेंगे…. ।

बीबी को बचपन से लहंगे का शौक है, सासूजी ने भेज दीनी साडी…।

न जाने वर कैसे मिलेंगे।

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