विदाई के वक्त डोली में बैठती बेटी को परिवारजनों की सीख PUNJABI LOKGEET

सुन धीये मैं तैनूं बतावां, सुखी वसन दे ढंग सिखावां,

चाह मान जे घर विच पाणां, आपणा मान गुवावीं तूं…. |

 सुन धीये मैं  ……

पेके दिन भले लंघाये, भैणां तूं बस पराये

ओत्थे पेश न तेरी जाये, संभल के पैर टिकाई तूं।  

सुन धीये मैं…

सस-सोहरे नूं मां-प्यो जाणी, भैणां वांगु ननाण जठानी,

बोली कदै न कौड़ी वाणी सगा मिठत वाल निमाड़ी तूं।

 सुन धीये मैं…..

पेके घर दा मान न करना, हुक्म पति दा सिर ते धरना,

दासी बनके टहल करना आपां मान गुवावीं तूं ।  

सुन  धीये मैं. ……..

स्वामी है सुखदायी तेरा, कोई न उसतों उच्च उचेरा,

सेवा उसदी लाभ घनेरा, हो चाकर सेवा कमावीं तूं ।

 सुन धीये मैं…….

गली गुवांडिन हस्स बुलावी, वेख किसे नूं वट ना पावी,

चीज पराई हत्थ न लावी, चंगे अमल कमावीं तूं ।

 सुन धीये मैं………

हरदम बोली मीठी वाणी, गली गुवांडिन भैणां जाणी,

वाणी गंदी कदे न पावी दिन इज्जत नाल लंघावी तूं ।  

सुन धीये मैं…..

पावीं तूं एह सच्चा गहणा, राजी हुक्म मालिक विच रहणा,

कारज करके गुस्सा सहना, शीतल मन रखावीं तूं ।

 सुन धीये मैं……

सब तो उत्तम ऐह है गहणा, सज्जनदे विच उठना बैहना,

हर इक नूं तू जीजी कहणा, वरतन विच लयावीं तूं ।

 सुन धीये मैं…….

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